गाज़ा में इज़रायली सेना का कड़ा प्रहार हमास कमांडर शरीफ अल-हसनात ढेर

गाज़ा में इज़रायली सेना का कड़ा प्रहार हमास कमांडर शरीफ अल-हसनात ढेर

पश्चिम एशिया की सुलगती ज़मीन पर संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। इज़रायली रक्षा बलों (IDF) ने गाज़ा पट्टी में एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए हमास के एक और प्रमुख कमांडर को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई मध्य गाज़ा के दीर अल-बलाह इलाके में अंजाम दी गई, जहां हमास की मिलिट्री विंग अल-क़सम ब्रिगेड से जुड़े कंपनी कमांडर शरीफ अल-हसनात (Sharif al-Hasanat) को एक हवाई हमले में मार गिराया गया। इस ताज़ा सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि इज़राइल अपने सैन्य लक्ष्यों से पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

जब आप इस संघर्ष के तकनीकी और सामरिक पहलुओं को करीब से देखते हैं, तो यह समझ आता है कि इज़रायली सेना केवल सतही हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हमास की उस अदृश्य ताक़त को खत्म करने में जुटी है जो ज़मीन के नीचे दबी हुई है।

अंडरग्राउंड नेटवर्क और सुरंगों की रीढ़ पर हमला

शरीफ अल-हसनात का खात्मा सिर्फ एक कमांडर की मौत भर नहीं है। इज़रायली सेना की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, हसनात लंबे समय से गाज़ा में हमास के अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर यानी सुरंगों के नेटवर्क को फिर से जीवित करने और उसे मजबूत करने के अभियानों का नेतृत्व कर रहा था। युद्ध के लंबे दौर के बाद जब हमास अपने नष्ट हुए ठिकानों और बंकरों को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा था, तब अल-हसनात इस पूरी योजना के केंद्र में था।

इज़राइल के दृष्टिकोण से, यह सुरंगें हमास की जीवन रेखा हैं। इन्हीं गुप्त रास्तों के सहारे हथियार छिपाए जाते हैं, लड़ाके एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचते हैं और अचानक हमलों की रूपरेखा तैयार होती है। सेना ने साफ कहा कि हसनात लगातार इज़रायली सैनिकों और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक सक्रिय खतरा बना हुआ था। उसकी गतिविधियों से यह साफ हो रहा था कि वह आने वाले समय में नए हमलों की ज़मीन तैयार कर रहा है, जिसके बाद यह लक्षित हमला किया गया।

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अतीत के साये और नवंबर 2023 की कड़वी यादें

इस घटनाक्रम का एक और पहलू भी चर्चा में है जो इस जंग की जटिलता को उजागर करता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि नवंबर 2023 में जब बंधक-मुक्ति समझौता हुआ था, तब अल-हसनात उन लोगों में शामिल था जिन्होंने रेड क्रॉस को बंधकों को सौंपने की तथाकथित 'प्रक्रियाओं' या आयोजनों में हिस्सा लिया था। एक तरफ कूटनीतिक समझौतों की औपचारिकताएं थीं, तो दूसरी तरफ ज़मीन के नीचे युद्ध की रणनीति को धार दी जा रही थी। यही विरोधाभास इस पूरे संघर्ष की वास्तविकता है, जहां शांति वार्ताओं और हमलों की जमीन के बीच एक बारीक लकीर खिंची होती है।

इज़रायली सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस स्ट्राइक से पहले नागरिकों को होने वाले नुकसान को कम से कम करने के लिए आवश्यक उपाय किए गए थे, हालांकि इस तरह के घनी आबादी वाले इलाकों में होने वाले हमलों के मानवीय पहलुओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

इज़राइल का अंतिम लक्ष्य और गाज़ा का भविष्य

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इज़रायली सैन्य नेतृत्व का रुख इस पूरे मामले में बेहद सख्त और स्पष्ट रहा है। उनका मानना है कि जब तक हमास का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता और वह गाज़ा की सत्ता से पूरी तरह बाहर नहीं हो जाता, तब तक इस युद्ध का कोई स्थायी विराम संभव नहीं है। 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद से इज़राइल ने जिस नीति पर चलना शुरू किया था, वह आज भी उतनी ही आक्रामक है।

हमास की सैन्य क्षमताओं को टुकड़ों में तोड़ना और उसके नेतृत्व को एक-एक करके नेस्तनाबूद करना इज़रायली रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। शरीफ अल-हसनात का मारा जाना इसी लंबी रणनीति की एक कड़ी है, जो यह साबित करती है कि युद्ध के मैदान में छिपे हुए कमांडरों के लिए बचना अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कमांडर के खात्मे के बाद हमास का स्थानीय नेतृत्व किस तरह से प्रतिक्रिया देता है और क्या गाज़ा में संघर्ष का दायरा और अधिक फैलता है।

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Lily Young

With a passion for uncovering the truth, Lily Young has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.