ईरान को कमज़ोर समझने की गलती कर रहे ट्रंप? मसूद पेज़ेशकियान की इस चेतावनी का असली मतलब समझिए

ईरान को कमज़ोर समझने की गलती कर रहे ट्रंप? मसूद पेज़ेशकियान की इस चेतावनी का असली मतलब समझिए

वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के बीच जो ताज़ा ज़ुबानी जंग छिड़ी है, उसने खाड़ी क्षेत्र में बारूद की गंध को और गहरा कर दिया है। ट्रंप ने हाल ही में सीना ठोककर दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की अधिकांश सैन्य क्षमताओं को नेस्तनाबूद कर दिया है। इस दावे पर तेहरान चुप नहीं बैठा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने तुरंत पलटवार किया और ट्रंप को ऐसा जवाब दिया जिसने पूरे पश्चिम एशिया के कूटनीतिक गलियारे को हिलाकर रख दिया है।

पेज़ेशकियान ने साफ लहजे में कहा कि ईरान अपनी मातृभूमि के एक-एक इंच की रक्षा केवल बातों से नहीं, बल्कि अपने एक्शन से करेगा। यह बयान महज़ कोई रस्म अदायगी नहीं है। यह सीधे तौर पर अमेरिका की सैन्य धमकियों को दी गई खुली चुनौती है।

जमीन पर क्या बदला? पेज़ेशकियान का बड़ा सवाल

ट्रंप के दावों की हवा निकालते हुए पेज़ेशकियान ने सीधे युद्ध के नतीजों पर बात की है। उन्होंने सरकारी टीवी पर प्रसारित अपने संदेश में पूछा कि अमेरिकी हुक्मरानों की बयानबाज़ी तो लगातार जारी है, लेकिन क्या उन्होंने युद्ध के मैदान में अपने लक्ष्यों को हासिल कर लिया है?

यह सवाल सीधे ट्रंप की रणनीति पर चोट करता है। जो ताकतें ईरान के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देख रही थीं, वे आज खुद ज़मीनी दलदल में उलझी हुई हैं। पेज़ेशकियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप की अभद्र और अपमानजनक टिप्पणियां खुद अमेरिकी प्रशासन के ही गिरते स्तर को दर्शाती हैं, ईरानी जनता ऐसी फूहड़ बयानबाज़ी से डरने वाली नहीं है।

क्या सच में कमज़ोर हुआ है ईरान?

अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उनके हवाई हमलों ने ईरान की रीढ़ तोड़ दी है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इस दावे से मेल नहीं खाती। अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में हाल ही में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले दर्ज किए गए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास का पूरा इलाका इस समय युद्ध के मुहाने पर खड़ा है।

ईरान की असली ताकत उसकी मिसाइलें और रीजनल मिलिशिया नेटवर्क हैं। पेज़ेशकियान पहले भी कह चुके हैं कि अगर ईरान के पास मिसाइल क्षमता न होती, तो दुश्मन देश इस मुल्क को कब का लूट चुके होते। इसलिए, अपनी रक्षात्मक सैन्य क्षमताओं को सरेंडर करने का ईरान का कोई इरादा नहीं है। ट्रंप चाहे कूटनीतिक दबाव बनाएं या सैन्य हमले करें, ईरान का रक्षा ढांचा पूरी तरह सक्रिय है।

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आंतरिक एकता का दांव और अमेरिकी रणनीति

ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद जगजाहिर हैं। सुधारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच अक्सर खींचतान देखने को मिलती है। मसूद पेज़ेशकियान इस कमज़ोरी को अच्छी तरह समझते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने हालिया बयान में देश के भीतर एकजुटता पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया।

पेज़ेशकियान ने चेताया कि बाहरी ताकतों के विभाजनकारी मंसूबों को नाकाम करने के लिए घरेलू मोर्चे पर एकता बेहद ज़रूरी है। अगर देश के भीतर आपसी मतभेद बढ़ते हैं, तो इससे सीधे तौर पर देश की ताकत कमज़ोर होगी। वे चाहते हैं कि राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर पूरी जनता देश की संप्रभुता के लिए एक सुर में खड़ी हो। यह रणनीति ट्रंप के उस दांव को नाकाम करने के लिए है, जिसके तहत अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों और हमलों के ज़रिए ईरान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की निगाहें

इस पूरे टकराव का सबसे संवेदनशील हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री कच्चे तेल का परिवहन इसी संकरे रास्ते से होता है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उस पर हमले नहीं थमे, तो वह इस पूरे रास्ते को ब्लॉक कर देगा।

अगर ईरान ऐसा कदम उठाता है, तो वैश्विक तेल बाज़ार में कोहराम मच जाएगा। तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया को भारी आर्थिक मंदी की तरफ धकेल सकती हैं। ट्रंप के आक्रामक रवैये के बावजूद अमेरिकी सहयोगी देश भी इस बात से डरे हुए हैं। वे नहीं चाहते कि यह जंग एक बड़े वैश्विक आर्थिक संकट में तब्दील हो जाए।

पेज़ेशकियान का यह पलटवार सिर्फ वाशिंगटन के लिए चेतावनी नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश भी है कि ईरान घुटने टेकने के मूड में बिल्कुल नहीं है। ट्रंप के भारी दबाव की नीति इस बार तेहरान पर बेअसर साबित हो रही है। अब गेंद अमेरिकी पाले में है कि वे इस ज़मीनी हकीकत को स्वीकार करते हैं या क्षेत्र को और बड़े विनाश की ओर धकेलते हैं।

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Wei Ramirez

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