रूस के सबसे सुरक्षित ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर यूक्रेनी ड्रोन अटैक के बाद लगी भीषण आग ने पुतिन की चिंता क्यों बढ़ा दी है

रूस के सबसे सुरक्षित ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर यूक्रेनी ड्रोन अटैक के बाद लगी भीषण आग ने पुतिन की चिंता क्यों बढ़ा दी है

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं है। यूक्रेन के ड्रोन अब रूस के उन इलाकों में घुसकर तबाही मचा रहे हैं जिन्हें मॉस्को सबसे सुरक्षित मानता था। ताजा मामला बाशकोर्टोस्तान (Bashkortostan) क्षेत्र का है। यहाँ यूक्रेन के स्पेशल ऑपरेशन्स फोर्सेज (SOF) ने रूस के एक बड़े ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर यूक्रेनी ड्रोन अटैक किया, जिसके बाद वहां तेज धमाकों के साथ भीषण आग लग गई।

यह हमला कोई आम हमला नहीं है। जिस प्लांट को निशाना बनाया गया है, वह यूक्रेन की सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर दूर है। इतनी लंबी दूरी तय करके रूसी हवाई सुरक्षा तंत्र को चकमा देना और सीधे रिफाइनरी के सबसे नाजुक हिस्से को तबाह करना रूस के सैन्य रणनीतिकारों के लिए एक बड़ा झटका है।

आखिरी सुरक्षित किला भी ढह गया

हमले का शिकार बना गैज़प्रॉम नेफ्तिखिम सालावत (Gazprom Neftekhim Salavat) प्लांट रूस के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल और तेल शोधन परिसरों में से एक है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 में यह रूस का एकमात्र ऐसा बड़ा पेट्रोल उत्पादक प्लांट बचा था जो अब तक यूक्रेनी हमलों से पूरी तरह सुरक्षित था। लेकिन इस ताजा हमले के बाद रूस का यह आखिरी किला भी ढह गया है।

इस हमले में सालावत प्लांट के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी AVT-6 प्राइमरी ऑयल डिस्टिलेशन यूनिट को निशाना बनाया गया। जब इस मुख्य यूनिट में विस्फोट हुआ, तो आसमान में काले धुएं का गुबार उठने लगा जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था। स्थानीय लोगों ने सुबह कई धमाकों की आवाजें सुनीं।

हमले के पीछे किसका हाथ था

इस बार का हमला सिर्फ यूक्रेन की सीमा पार से उड़कर आए ड्रोनों का नतीजा नहीं था। यूक्रेन की स्पेशल फोर्सेज ने इस ऑपरेशन को रूस के भीतर काम कर रहे एक स्थानीय रेजिस्टेंस ग्रुप 'चोर्नया इस्करा' (Chornaya Iskra - ब्लैक स्पार्क) के सहयोग से अंजाम दिया। इस आंतरिक मिलीभगत ने रूसी सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। सोचिए, युद्ध के बीच रूस के अंदर ही ऐसे गुट सक्रिय हैं जो यूक्रेन की सेना को सटीक इनपुट और लॉजिस्टिक्स दे रहे हैं।

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सिर्फ सालावत नहीं, क्रास्नोडार भी दहला

उसी रात यूक्रेनी ड्रोनों ने सिर्फ बाशकोर्टोस्तान को ही निशाना नहीं बनाया। दक्षिणी रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र में स्थित अफीप्सकी (Afipsky) तेल रिफाइनरी पर भी घातक हमला हुआ। वहां भी धमाकों के बाद टैंक फार्म में भयंकर आग लग गई। स्थानीय प्रशासन ने आग लगने की बात तो मानी, लेकिन हमेशा की तरह दावा किया कि उन्होंने ज्यादातर ड्रोनों को मार गिराया था और आग मलबे गिरने की वजह से लगी। हकीकत क्या है, यह रिफाइनरी से उठती लपटें खुद बयां कर रही थीं।

रूस के लिए इसके क्या मायने हैं

रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है, लेकिन लगातार हो रहे इन ड्रोन हमलों ने उसकी घरेलू ईंधन आपूर्ति की रीढ़ तोड़ दी है।

  • ईंधन की किल्लत और राशनिंग: लगातार रिफाइनरियों के ठप होने से रूस के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी हो गई है। सरकार को कई क्षेत्रों में ईंधन की राशनिंग लागू करनी पड़ी है ताकि सेना और आवश्यक सेवाओं के लिए तेल कम न पड़े।
  • आर्थिक चोट: इन रिफाइनरियों को ठीक करने में महीनों का समय लगता है, खासकर तब जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस को जरूरी स्पेयर पार्ट्स और तकनीक आसानी से नहीं मिल पा रही है।
  • सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: 1,500 किलोमीटर की दूरी तय करके ड्रोन का रूस के सुदूर इलाके में घुस जाना यह दिखाता है कि रूस का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से अभेद्य नहीं है।

यूक्रेन की रणनीति बिल्कुल साफ है। वे रूस को सीधे युद्ध के मैदान में हराने के बजाय उसकी आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को पंगु बना रहे हैं। जब तक रूस की रिफाइनरियों से धुआं निकलता रहेगा, तब तक यूक्रेन को युद्ध में एक मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलती रहेगी। अब देखना यह है कि पुतिन इन हमलों को रोकने के लिए अपनी वायु सेना और खुफिया तंत्र में क्या बड़े बदलाव करते हैं।

इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए रखें क्योंकि तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा असर होना तय है।

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Alexander Murphy

Alexander Murphy combines academic expertise with journalistic flair, crafting stories that resonate with both experts and general readers alike.