अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां से पीछे हटना दोनों ही देशों के लिए नामुमकिन लग रहा है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भड़की यह आग अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी चपेट में ले चुकी है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने नेता की मौत का बदला लेकर रहेगा और उसकी सेना किसी भी कीमत पर हॉर्मुज से पीछे नहीं हटने वाली है।
लेकिन क्या यह सिर्फ एक खोखली धमकी है या फिर हम तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं? सच तो यह है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की बौखलाहट और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के तेवर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का यह नया संकट कितना गंभीर है
हॉर्मुज जलडमरूमध्य कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है। यह पूरी दुनिया की नस है। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने हाल ही में इस रूट को बंद करने का एलान किया और एक मालवाहक जहाज पर हमला कर दिया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस आक्रामक अंदाज में जवाब दिया, उसने जलती आग में घी का काम किया है।
ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि हॉर्मुज खुला रहेगा और उन्होंने ईरान की सेना को 'तहस-नहस' करने के आदेश दे दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के ठिकानों, मिसाइल डिपो और रडार सिस्टम पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की नौसैनिक ताकत को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है।
मोजतबा खामेनेई का पहला और सबसे बड़ा इम्तिहान
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने ईरान की कमान संभाली है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी साख बचाने और देश के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने की है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, मोजतबा ने कसम खाई है कि वे अपने पिता की हत्या का बदला उन अपराधियों से जरूर लेंगे जिन्होंने इस जंग की शुरुआत की थी।
ईरान के लिए यह जंग अब सिर्फ जमीन या पानी की नहीं रह गई है। यह उनकी आन-बान और शान की लड़ाई बन चुकी है। यही वजह है कि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कतर और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगियों के सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दाग दी हैं। वे सीधे तौर पर दिखाना चाहते हैं कि अगर ईरान डूबेगा, तो वह पूरे मिडिल ईस्ट को अपने साथ लेकर डूबेगा।
क्या वाकई हॉर्मुज को बंद कर सकता है ईरान
हॉर्मुज को पूरी तरह बंद करना ईरान के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन वह इसमें खलल जरूर डाल सकता है। ईरान की रणनीति सीधी है। वे बड़े जहाजों पर ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलों से हमले कर रहे हैं ताकि बीमा कंपनियां इस रास्ते से जाने वाले जहाजों का प्रीमियम इतना बढ़ा दें कि कोई वहां जाने की हिम्मत ही न करे।
अमेरिका ने इसके जवाब में समुद्री नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि अब ईरान के बंदरगाहों से न तो कोई तेल बाहर जा पाएगा और न ही कोई जरूरी सामान अंदर आ सकेगा। यह एक तरह से सीधे युद्ध का एलान है।
इस जंग के वैश्विक आर्थिक परिणाम क्या होंगे
अगर यह गतिरोध कुछ हफ्ते और चला, तो दुनिया को एक बड़े आर्थिक झटके के लिए तैयार रहना चाहिए।
- कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं: हॉर्मुज बंद होने का सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा। तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई अनियंत्रित हो जाएगी।
- सप्लाई चेन ठप होना: एशिया से यूरोप जाने वाले मालवाहक जहाजों को अब अफ्रीका का चक्कर लगाकर लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। इससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों दोगुने हो जाएंगे।
- खाड़ी देशों में अस्थिरता: ईरान के हमलों की जद में आने वाले देश जैसे सऊदी अरब और यूएई अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। यदि उनके तेल कुओं पर हमले होते हैं, तो वैश्विक बाजार पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।
आगे का रास्ता क्या है
ईरान और अमेरिका दोनों ही इस समय अपनी जिद पर अड़े हैं। डोनाल्ड ट्रंप अपनी ताकत के दम पर ईरान को घुटनों पर लाना चाहते हैं, जबकि ईरान के नए कमांडर और सुप्रीम लीडर मोजतबा अपनी जनता के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहते।
इस युद्ध को टालने का एकमात्र तरीका यही है कि ओमान या अन्य मध्यस्थ देश दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाएं। लेकिन जब तक दोनों देशों के बीच आत्मसम्मान और बदले की भावना हावी रहेगी, तब तक हॉर्मुज की लहरों से बारूद की गंध आती रहेगी। दुनिया को अब बेहद संभलकर कदम उठाने होंगे, क्योंकि एक भी गलत मिसाइल पूरी दुनिया को मंदी और तबाही की गहरी खाई में धकेल सकती है।